Madhya Pradesh Elections By-polls 2020:- सागर में भाजपा को झटका।

सागर में भाजपा को झटका:- कमलनाथ से मिलकर कांग्रेस में शामिल हुई पूर्व बीजेपी विधायक पारुल साहू, आज कमलनाथ ने दिलाई कांग्रेस सदस्यता।

कमलनाथ के साथ पारुल साहू
कमलनाथ के साथ पारुल साहू

• मध्यप्रदेश की सुर्खी विधानसभा से इस बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ सकती है पारुल साहू।

• पारुल साहू ने 2013 में गोविंद सिंह राजपूत को 141 वोटों से हराया था लेकिन इसके बाद भी भाजपा ने 2018 में उनका टिकट काट दिया था और ऐसा माना जा रहा है कि इसी से नाराज़ होकर साहू कांग्रेस में शामिल हो गई है।


सुरखी से 2013 में विधायक रह चुकी पारुल साहू ने आज शुक्रवार को कांग्रेस कि सदस्यता ले ली है। उन्होंने गुरुवार की रात पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से भोपाल में मुलाकात कर बीजेपी को मुश्किलों में डाल दिया था, बीजेपी के बड़े नेताओं के लाख़ मानने के बावजूद भी वो नहीं मानी और आज कांग्रेस में शामिल हो गई।

 सूत्रों की मानें तो इसके पीछे की वजह गोविंद सिंह राजपूत का बीजेपी में शामिल होना बताया जा रहा है, और वो मानते है कि बस इसी से पारुल साहू नाराज़ हो गई और कांग्रेस ज्वाइन कर ली। 


2013 में चिर-प्रतिद्वंद्वी थे ये दोनों नेता और 2018 में बीजेपी ने गोविंद सिंह राजपूत का टिकट काट दिया था। मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर पारुल साहू ने इस पर कुछ भी नहीं कहा, हालांकि इन सब को लेकर वो सोशल मीडिया पर लगातार अपना गुस्सा दिखाती रही है।

राजनीतिक जानकारों की माने तो पारुल साहू का ऐसे वक़्त में बीजेपी में शामिल होना पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है और उनका मानना है कि इस से पार्टी को आने वाले उपचुनाव में तगड़ा झटका लग सकता है।

पारुल साहू कल दोपहर मंत्री भूपेंद्र सिंह से भी मिली थीं, मीडिया को बताते हुए भूपेंद्र सिंह ने कहा था कि "आगे क्या होगा ये तो पता नहीं, अभी फ़िलहाल तो बीजेपी में ही है, कल किसने देखा है ?"

अब सुर्खी में दो पुराने प्रतिद्वंदियों के बीच मुकाबला तय मना जा रहा है।


आज क्या हुआ ? 

•  कमलनाथ ने साहू को विधिवत कांग्रेस की सदस्यता दिलायी और कहा कि उनके परिवार का कांग्रेस से पुराना नाता रहा है और ये सुश्री साहू की घर वापसी है।

• कमलनाथ ने कहा कि राज्य में सत्तारूढ़ दल भाजपा उपचुनावों को लेकर खोखलीं घोषणाएं कर रही है, लेकिन मतदाता समझदार हैं और वे बहकावें में आने वाले नहीं हैं।

• सुश्री पारुल साहू वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में सुरखी से भाजपा की टिकट पर पहली बार चुनाव जीतकर विधायक बनीं थीं। उस समय उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर गोविंद राजपूत को पराजित किया था।

• वर्ष 2018 के चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला और उसके बाद से ही वे संगठन से नाराज बताई जा रहीं थीं।


बहरहाल, देखना होगा कि इस उपचुनाव में शिवराज-सिंधिया फैक्टर कितना सार्थक साबित होता है और कमलनाथ की रणनीति क्या रंग लाती है? 

वहीं चुनाव आयोग पहले ही साफ कर चुका है कि मध्य प्रदेश में उपचुनाव बिहार चुनाव के साथ ही होंगे। चुनाव आयोग ने कहा है कि नवंबर से पहले-पहले चुनाव होंगे, हांलाकि तारीख की घोषणा अभी तक नहीं की गई है लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि मध्यप्रदेश में 15 नवंबर तक उपचुनाव हो सकते हैं।

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