मथुरा में लॉकडाउन के वक्त एक बड़ी रेल दुर्घटना.

लॉकडाउन के वक्त एक बड़ी रेल दुर्घटना मथुरा में देखने को मिली हैं, जहां मालगाड़ी के 04 डिब्बे पटरी से उतर गए, ये दुर्घटना उस वक़्त हुई है जब देश में ट्रेन संचालन ठप्प पड़ा हुए है, और मात्र 02-04 गिनी-चुनी हुई ट्रेनें ही चल रही है।     देखे इसको......

अब तफसील से जानते है कि आखिर ये दुर्घटना हुई कैसे ??
मथुरा के वृंदावन रोड रेलवे स्टेशन के पास ये रेल हादसा आज रविवार सुबह 10 बजे का है, जब मालगाड़ी लोहे की सरियों से लदी बल्लभगढ़, दिल्ली की ओर जा रही थी।

मथुरा में रेल दुर्घटना.

पटरी से उतरे मालगाड़ी के चार के डिब्बे।
मथुरा, थाना वृंदावन क्षेत्र के जैत छटीकरा के बीच एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई, जिसमें की चार डब्बे क्षतिग्रस्त हो गए।
मालगाड़ी विशाखापट्टनम से आ रही थी और उसको बल्लबगढ़ (जो कि दिल्ली के पास पड़ता है) के लिए ले जाया जा रहा था।
रविवार सुबह 10:02 मिनट पर ये हादसा हुआ।
वही इस मालगाड़ी के गार्ड विजय कुमार से जब पूछा गया तो उसने हमको बताया कि शायद एक्सल टूटने की वजह से यह हादसा हुआ है और ये भी बोला की ये जांच का विषय है, उच्च अधिकारी इसकी जांच करेंगे तभी इसका सही कारण पता चल पाएगा। 
मालगाड़ी लोहे की सरिया लेकर आगरा से हो कर दिल्ली की ओर जा रही थी, जो वृंदावन रोड़ एक हाल्ट स्टेशन के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसका खम्मा नंबर 1408 हमको पता चला है।
गनीमत ये रही कि किसी को भी जान की हानि नही हुई। हालांकि डिब्बे पटरी से उतरने के बाद पूरा रेलमार्ग बाधित हो गया और इस से Covid - 19 Special Passenger Trains और दूसरी मालगाड़ियों पर खासा प्रभाव पड़ा जिनको Diverted Route से उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया।

दुर्घटना की सूचना मिलते ही रेलवे के अधिकारी व कर्मचारियों में हड़कम्प मच गया। सभी कर्मचारी  ट्रैक को साफ़ कर डिब्बों को पटरी पर चढ़ाने में लग गए। वहीं रेलवे के उच्चाधिकारी इसकी जांच करने में जुट गए हैं।
मौके पर सी.ओ. व एसडीएम सदर (मथुरा), रेलवे आगरा मंडल के डी.आर.एम. सुशील कुमार श्रीवास्तव व तमाम रेल अधिकारी मौके पर पहुंचे गए।

जब Loktantra TV की टीम ने इस मामले के संबंधित अधिकारी (वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक, अकांशु गोविल) से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने 02 बार Loktantra TV के पत्रकार का फोन काट दिया  जिस से कुछ अहम और बुनियादी जानकारी लोकतंत्र टीवी को नहीं मिल पाई।......……. देखे इसको.....
                                          

उसके बाद हमने आगरा मंडल के जन सम्पर्क अधिकारी से बात की  तो उन्होंने बताया कि.........सुनिए इसमें...…
                                          

अक्सर हम सभी लोग देखते है कि रेल मंत्री पियूष गोयल, उनकी तमाम पी.आर. एजेंसी और रेलवे के अनेक अधिकारी सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक आदि) पर रेल की अच्छी और बेहतरीन लुभाने वाली तस्वीरें जनता को पेश करते है, लेकिन ये रेल दुर्घटना उनकी असलियत दिखाती हैं और सरकार के झूठे दावों की सच्चाई को बयां करती है कि भारतीय रेल कितनी ज्यादा प्रगति पर है।
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुलेट ट्रेन की बाते करते है लेकिन जब इस देश में 50 किलोमीटर की औसतन स्पीड चलने वाली  मालगाड़ी ही नहीं ढंग से चलपा पा रहे है तो 540 किलोमीटर की रफ्तार से चलने वाली बुलेट ट्रेन का चलना कैसे संभव हो पाएगा इसका जवाब दे पाना हमारे लिए थोड़ा मुश्किल है।

अब इन सब से सवाल ये उठता है कि अगर सभी नियमित गाड़ियां चल रही होती और अगर इस माल गाड़ी की जगह कोई यात्री गाड़ी होती तो क्या होता ?
क्योंकि उस वक़्त Load भी बढ़ जाता है और ट्रेनों की संख्या भी बढ़ जाती है, इस से रेल की पटरियों पर खासा असर पड़ता है और वो घिस घिस कर कमजोर पढ़ जाती है जिससे बड़े रेल हादसे होते है और कई मासूम लोग अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठते है, जिसके बाद रेल मंत्री और रेल के कई बड़े अधिकारी नौकरी छोड़ कर इस से अपना पल्ला झाड़ लेते है और इन मुसीबतों से मुक्त हो जाते है।

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