3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जा रहा था , लोग पर्यावरण को बचाने के लिए सोशल मीडिया पर साइकिल को बढ़ावा देने की मुहिम भी चला रहे थे, और तमाम बड़े देशों के उदहारण भी पेश किये जा रहे थे जहाँ लोग साइकिल से सफर को अधिक बढ़ावा देते हैं ,इसी दौरान एक खबर आयी जिसने सब को चौंका दिया और हज़ारो लोगों एक झटके में बेरोज़गार हो गए । दरहसल देश की सबसे बड़ी साइकिल बनाने वाली कंपनी "एटलस" ने अपना प्रोडक्शन बन्द कर दिया ,कंपनी ने यह फैसला विश्व साइकिल दिवस के दिन ही लिया , इस फैसले कंपनी के कर्मचारी अवाक रह गए।
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देश की बड़ी साइकिल बनाने वाली कंपनी में शुमार एटलस साइकिल ने दिल्ली से सटे गाजियाबाद के साहिबाबाद में स्थित अपनी सबसे बड़ी फैक्ट्री को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। विश्व साइकिल दिवस के दिन कंपनी ने ये फैसला किया है, जिससे 1000 मजदूरों की नौकरी पर संकट आ गया है,बुधवार को सुबह जब मजदूर काम करने पहुंचे तो उन्होंने कंपनी के बाहर एक नोटिस लगा पाया जिसमें लिखा था कि कंपनी के पास फैक्ट्री चलाने का पैसा नहीं है।साहिबाबाद में एटलस की यह फैक्ट्री 1989 से चल रही है।
एटलस साइकिल ने साहिबाबाद की फैक्ट्री में लॉकडाउन से पहले हर महीने दो लाख साइकिलें बनाई जा रही थीं, इस हिसाब से पूरे साल में कंपनी करीब 50 लाख साइकिलों को बनाती थी।अब हालत यह है कि फैक्ट्री के मजदूरों और कर्मचारियों को मई माह का वेतन भी नहीं दिया गया है,ले-ऑफ नोटिस में कंपनी के प्रबंधक ने कहा कि संचालकों के पास फैक्टरी चलाने के लिए रकम नहीं है। कच्चा माल खरीदने तक के पैसे नहीं हैं,इसलिए कर्मचारियों को तीन जून से ले-ऑफ करने के लिए कहा गया है।
गौर करने वाली बात है की देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही अच्छी स्थिति में नही थी , कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन ने पूरी तरह से अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ कर रख दी ,एटलस ही नही अन्य कई कंपनिया मंदी की मार झेल रही है ,और व्यापक स्तर पर कर्मचारियों की छटनी की जा रही है , हालांकि मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का एलान तो जरूर किया है लेकिन इसका असर जामीन पर अभी दिखाई नही दे रहा , सरकार आत्मनिर्भर भारत और लोकल फ़ॉर वोकल को बढ़ावा देने की बात तो करती है लेकिन यदि इसी प्रकार से कंपनियां बंद होती रहेंगी तो यह सपना कैसे साकार होगा यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है ।
एटलस कंपनी बंद होने के वाद अन्य छोटे उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों में भी भय है उन्हें भी अब नौकरी जाने का डर सताने लगा है ,इसमें कालीन और हथकरघा उद्योग शामिल हैं


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