नेपाल से मजदूरी कर लौट रहे बहराइच के मज़दूर परिवार में शामिल एक महिला ने भारत-नेपाल के अंतरराष्ट्रीय सीमा नो-मेन्स लैण्ड पर ही एक बच्चे को जन्म दे दिया, सीमा पर जन्मे बच्चे को परिवार ने बार्डर कुमार नाम दिया है, लेकिन यह परिवार यह नहीं जानता था कि मेरा बच्चा दो देश का नागरिक भी हो सकता है।


 जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उड़ते ऐरोप्लेन में अगर कोई बच्चा जन्म लेता है, तो उड़ान भरने से लेकर लैंड होने तक किसी भी दो देशों की नागरिकता मांगने की वह बच्चा दावेदारी कर सकता है। उसी प्रकार दो देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जो नो-मेंस लैण्ड होती है उस पर जन्मा बच्चा भी दोनो देशों की नागरिकता की दावेदारी कर सकता है।


जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बार्डर कुमार भी भारत और नेपाल दोनों देशों की नागरिकता की दावेदारी कर सकता है।


भारत - नेपाल सीमा के नो मेंस लैण्ड सोनौली में जन्मे बच्चे के माता पिता जनपद बहराइच जिले के मोतीपुर तहसील के पृथ्वी पुरवा में रहते हैं, वो अपनी जीविका चलाने के लिये पत्नी जामतारा के साथ पड़ोसी देश नेपाल के नवलपरासी जिले में स्थित जगत ईंट फैक्ट्री पर मेहनत मजदूरी करता था, कोरोनाकाल के कारण बेरोजगार हुआ लालाराम अपने घर वापस आने की आस में अपनी गर्भवती पत्नी के साथ शनिवार को भारत नेपाल सीमा के सोनौली बार्डर पर पहुंचा।


जहाँ नो मेन्स लेण्ड पर बड़ी तादाद में भारतीय नागरिक भारत में आने के लिये जमा थे और भारतीय क्षेत्र में प्रवेश पाने के लिये अपनी अपनी बारी का इन्तिजार कर रहे थे। इसी दौरान लाला राम की गर्भवती पत्नी जामतारा को प्रसव पीड़ा शुरू हुई पत्नी की हालत देख लालाराम बैचेन हो गया, उसकी स्थित देख वहां मौजूद दूसरे भारतीय नागरिकों ने हिम्मत बंधाई और महिलायें मदद के लिये आगे बढ़ी व कुछ महिलाओं ने एक घेरा बनाते हुवे प्रसव पीड़िता को चादर के घेरे में लिया और दोनों देशों के बॉर्डर पर ही लालाराम की पत्नी ने शिशु को जन्म दिया।जानकारी मिलते ही बार्डर पर मौजूद पुलिस ने फौरन उसे इंट्री दी और एम्बुलेन्स की मदद से उसे नैतनवा सीएचसी भेजा गया, जहां जांच में जच्चा बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ्य पाये गये, पुत्र के पैदा होने पर लालाराम ने उसका नाम करण करते हुवे उसका नाम  "बार्डर कुमार" रखा है। लालाराम के पहले से दो बेटियां और एक बेटा है, यह उसकी चौथी सन्तान है। अब अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से बॉर्डर पर जन्मा लालाराम का पुत्र दोनों देशों की नागरिकता के लिए दावेदारी कर सकता है|